Monday, March 25, 2013

What Sindhutai Sapkal said...(marathi)

दुःखा ने दुःख पटकन टिपता येता.

माणुस कधीच वाईट नसतो, माणसाच्या पोटाची भूख वाईट असते.

बाई नहीं तर काही नहीं.

तुम्ही तरी घरी बायकोला कधीतरी 'थकलीस का' म्हणत ज़ा ना.

जब तक गाल पे गोश्त तब तक यार भी दोस्त.

मला ज़गताना त्रास नाही जहाला, पुस्तक लिहताना जहाला.

घरामध्ये कोन्हाला काय अवड्त ते तिला पाठ अस्त पण तिला काय अवड्त ते कुन्हाला माहिती पण नस्त.

आजच्या जगात 'भाषण नाही तर राशन नाही'.

1 comment:

  1. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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