Tuesday, October 12, 2010

वरदान

राज्य मिलेगा पर राजा-रानी साथ न रह पाएंगे. सोने की थाल सजेगी पर 
खाने को भोजन न मिलेगा. रमणीय वन-उपवन होंगे पर पैर धरने को 
वसुंधरा नहीं लावा होगा. मित्रगण भरपूर आएँगे पर बित्ती भर भी बात 
न कर पाएंगे. बेरोक टोक आवाजाही नसीब होगी पर गंतव्य पर आप
 का स्वागत नहीं है. पैरों में पाज़ेब पहनाये जायेंगे पर चलना दबे पाँव 
ही होगा. मधुर स्वर के स्वामी बनो पर गुनगुनाना मना है. सबकुछ मिलेगा 
पर उसके भोग पर मनाही है.

 हर सौगात के साथ एक परिच्छेद जो उस उपहार के मायने ही बदल दे.
 यह कैसा वरदान है के देनेवाला देते देते मेरा ही कुछ लेता जाए ?


रमणीय = beautiful, वसुंधरा = earth, बित्ती भर = a little bit, आवाजाही = thorough fare, 
गंतव्य = destination, परिच्छेद = clause/condition, वरदान = blessings

2 comments:

  1. does it really matter if i am not going to be drinking anyway :)

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